Biography of Atal Bihari Bajpayeeji in hindi – अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी हिंदी में

   Biography of Atal Bihari Bajpayeeji in hindi –  अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी हिंदी में 

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अटल बिहारी वाजपेई एक ऐसे बहुत प्रतिभा वान व्यक्ति थे जो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं, अटल बिहारी वाजपेई भारत के बहुत सम्माननीय राजनेता थे, ऐसे कम ही नेता होते जिन्हें भारत की राजनीति में एक सम्माननीय नजरों के साथ देखा जाता है,
अटल बिहारी वाजपेई तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने और लगभग 5 बार सांसद के रूप में सक्रिय रहे, अटल बिहारी वाजपेई एक राजनेता ही नहीं एक प्रखर प्रवक्ता और कवि भी थे| इन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है,
अटल बिहारी वाजपेई एक ऐसे राजनेता है, जो अलग-अलग चार राज्यों की 6 लोकसभा सीटों से भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें उ.प्र. के लखनऊ और बलरामपुर, गुजरात के गांधीनगर, मध्यप्रदेश के ग्वालियर और विदिशा एवं दिल्ली की नई दिल्ली संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाले अटलजी एकमात्र नेता हैं। 

अटल बिहारी जी का जन्म कहां और कब हुआ था?-

अटल बिहारी जी के परिवार में कौन-कौन है?-

अटल बिहारी वाजपेई जी ने शिक्षा कहां से प्राप्त की

अटल बिहारी जी की पत्नी का नाम क्या है

अटल बिहारी वाजपेई की बेटी का नाम क्या है

अटल बिहारी जी का राजनीतिक सफर

अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते किये गए कार्य

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार मंत्रिमंडल

अटल बिहारी वाजपेयी कितनी बार भारत के प्रधानमंत्री बने

अटल बिहारी जी की मृत्यु कब और कैसे हुई

अटल बिहारी जी की 5 प्रमुख कविताएं

अटल बिहारी वाजपेई जी के विचार

अटल बिहारी के बारे में 9 रोचक तथ्य

अटल बिहारी जी का जन्म कहां और कब हुआ था?- Where and when was Atal Bihari ji born

अटल बिहारी जी का जन्म स्थान ग्वालियर है, अटल बिहारी जी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 25 दिसंबर सन 1924 को हुआ था,(atal bihari vajpayee Birthday)  भारत में इस दिन को बड़ा दिन भी कहा जाता है,
 वैसे तो उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बड़केश्वर का रहने वाला था, लेकिन इनके पिता की नौकरी बतौर अध्यापक के तौर पर ग्वालियर रियासत में लगने पर इनका परिवार ग्वालियर आकर रहने लगा . 
अटल बिहारी वाजपेई के माता-पिता का नाम  पिता  पंडित कृष्ण बिहारी  सता माता  कृष्णा देवी  थी, अटल बिहारी जी के पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेई था, जो एक अध्यापक का कार्य करते थे .और माता जी का नाम कृष्णा देवी था, जो एक ग्रहणी के रूप में कार्य करती थी।


अटल बिहारी वाजपेई की व्यक्तिगत जानकारी
वास्तविक नाम अटल बिहारी वाजपेई
उपनाम अटल बिहारी वाजपेई
व्यवसाय राजनेता
जन्मतिथि २५ दिसंबर १ ९ २४
जन्मस्थान ग्वालियर
धर्म हिन्दू
जाति ज्ञात नहीं है
मृत्यु 16 अगस्त 2018

अटल बिहारी जी के परिवार में कौन-कौन है?-All information about atal bihari bajpayi’s family

अटल बिहारी जी , पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेई और कृष्णा देवी की सातवीं संतान थे, अटल बिहारी वाजपेई जी से बड़े तीन भाई और तीन बहने थी इनके बड़े भाइयों के नाम इस प्रकार है,अवधबिहारी वाजपेयी, सदाबिहारी वाजपेयी तथा प्रेमबिहारी वाजपेयी। 
 पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बटेश्वर से मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में बतौर अध्यापक की नौकरी लगने के बाद यहीं शिफ्ट हो गए थे. और माँ कृष्णादेवी एक गृहणी थी।


अटल बिहारी वाजपेई का परिवार
नाम अटल बिहारी वाजपेई
पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी
माता का नाम कृष्णा देवी

अटल बिहारी वाजपेई जी ने शिक्षा कहां से प्राप्त की – Where did Atal Bihari Vajpayee get his education

अटल बिहारी वाजपेई जी की शुरुआती शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर गोरकी बाड़ा विद्यालय में हुई इन्होंने आठवीं तक की शिक्षा यहीं से प्राप्त की और इसी विद्यालय में इन्होंने सर्वप्रथम कक्षा 5 में पहली बार भाषण दिया था, इसके बाद उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज जो वर्तमान में लक्ष्मी बाई के कॉलेज से जाना जाता है, 
उसे दिए की शिक्षा प्राप्त की इन्होंने कॉलेज जीवन से ही राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था, यह सबसे पहले छात्र संगठन से जुड़े और यह उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कार्यकर्ता  नारायण राव से बहुत प्रभावित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से जुड़कर शाखा प्रभारी के रूप में भी कार्य किया



अटल बिहारी जी की पत्नी का नाम क्या है – Atal bihari vajpayee’s wife name

कई बार सोशल मीडिया पर यह पूछा जाता है कि अटल बिहारी जी की पत्नी का नाम क्या था तो हम आपको इस विषय पर कुछ बताना चाहेंगे की अटल बिहारी वाजपेई ने शादी क्यों नहीं की, अटल बिहारी वाजपेई जी ने आजीवन अविवाहित रहने का प्रण लिया हुआ था,
  जब अटल बिहारी वाजपेई जी से पत्रकारों द्वारा इस विषय में पूछा जाता था, तो उनका जवाब यह होता था कि व्यस्तता के चलते वह शादी नहीं कर सकते थे, और जब यही सवाल उनसे विपक्ष द्वारा पूछे जाने पर जवाब दिया था कि मैं अविवाहित जरूर हूं ,लेकिन मैं कुंवारा नहीं हूं जिसके बाद कभी भी विपक्ष द्वारा उनके शादी के विषय में सवाल नहीं किया गया,
 और उसमें से जो उनके परिवार से पूछा जाता था तो उनका कहना होता था कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन और सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए जो वचन आजीवन अविवाहित रहने का लिया था उसका पालन किया है।
कॉलेज के दौरान इनकी मित्रता एक महिला से हुई थी जिसके बारे में ‘अटल बिहारी बाजपेई: ए मैन ऑफ ऑल सीजंस’ किताब में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि कॉलेज के दिनों में राजकुमारी कॉल नाम की महिला से एक चिट्ठी लिखकर अपने पहले प्यार का इजहार किया था लेकिन इनका यह प्यार कुछ कारणों से सफल नहीं हो पाया।



अटल बिहारी वाजपेई की बेटी का नाम क्या है – ATal bihari vajpayee’s daughter name

अब आप लोग यह कहेंगे कि ऊपर वाले लेख में हमने आपको यह बताया कि अटल बिहारी वाजपेई ने कभी शादी नहीं की वह आजीवन अविवाहित रहे लेकिन अब हम आपको उनकी एक बेटी के बारे में बताएंगे उनकी एक नमिता भट्टाचार्य नाम की बेटी थी,
 जो असल में राजकुमारी कौल की बेटी थी रंजना भट्टाचार्य के पिता बृज नारायण कौन थे जिनकी शादी राजकुमारी कौल से हुई थी और बृज नारायण कॉल और राजकुमारी कौल की बेटी रंजना भट्टाचार्य को अटल बिहारी वाजपेई द्वारा गोद लिया गया था,
 कॉल और वाजपेई के बीच पारिवारिक संबंध काफी पुराने थे पहला पति बृज नारायण कॉल की मृत्यु के बाद कौन अटल जी के घर में रहने लगी थी और यह उनके अंतिम समय तक उनके साथ रहे



अटल बिहारी जी का राजनीतिक सफर – Atal Bihari’s political journey

बिहारी जी ने अपना राजनीतिक सफर कॉलेज के दिनों से ही शुरु कर दिया था कॉलेज के दिनों में वह छात्र राजनीति नहीं सक्रिय थे जिसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नारायण राव से प्रभावित होकर व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े
सन 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से भारतीय जन संघ पार्टी बनी इस समय अटल बिहारी वाजपेई की भूमिका श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं के कंधे से कंधा मिलाकर चलने की थी और फिर इसके बाद अटल बिहारी वाजपेई सन 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कार्य किया
यदि उनके पहले चुनाव लड़ने की बात की जाए तो अटल बिहारी बाजपेई ने सर्वप्रथम लोकसभा का चुनाव लखनऊ लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश से लड़ा जो एक उपचुनाव था लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा
सन 1957 में  जनसंघ  द्वारा उन्हें 3 लोकसभा सीटों पर चुनाव में उतारा गया जिनमें लखनऊ मथुरा और बलरामपुर सीट थी इसमें से लखनऊ और मथुरा में वह हार गए लेकिन बलरामपुर संसदीय सीट में चुनाव जीतकर वह लोकसभा में पहुंचे थे और यह उनके जीवन की पहली जीत थी
तत्पश्चात सन 1967 में उन्होंने इसे एक बार लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन इस चुनाव में वे जीत नहीं पाए इसके बाद उसी समय एक उपचुनाव हुआ जिसमें वह जीत कर सांसद बने
सन 1968 में अटल बिहारी वाजपेई जी को जन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया जिसमें उनके साथ बलराज मधोक लालकृष्ण आडवाणी और नानाजी देशमुख जैसे बड़े कद्दावर नेता थे
1971 में अटल बिहारी वाजपेई जी मध्य प्रदेश की ग्वालियर सीट से चुनाव में उतरे और जीतकर संसद पहुंचे
जब 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार बनी जब अटल बिहारी वाजपेई जी को भारत का विदेश मंत्री बनाया गया और 1977 से 1979 तक वे भारत के विदेश मंत्री के रूप में कार्य करते रहें अटल बिहारी वाजपेई विदेश मंत्री बनाने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ महासंघ में हिंदी इमेज संबोधित करने वाले एक पहले नेता थे
इसके बाद किसी कारणों से अंदर कला होने के कारण जनता पार्टी बिखर गई और 1980 में तल बिहारी वाजपेई भारतीय जनता पार्टी मैं जुड़ गए इनके साथ इन के सभी पुराने मित्रों साथ आए बकायन लाइट
अटल जी ने जब 1984 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर से लोकसभा सीट के लिए नामांकन किया तब उनके खिलाफ कांग्रेस के माधवराव सिंधिया को उतारा गया इस चुनाव में माधवराव सिंधिया से अटल बिहारी वाजपेई जी पौने दो लाख वोटों से हार चुके थे
इसके बाद सिंधिया जी ने 1991 के आम सभा चुनाव में लखनऊ और मध्य प्रदेश के विदिशा सीट से चुनाव लड़ा और इस बार वह दोनों ही सीट से विजई हुए इसके बाद उन्होंने अपनी विदिशा सीट छोड़ दी थी
1998 अटल बिहारी जी लखनऊ और गुजरात के गांधीनगर से लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे गांधीनगर सीट पर हमेशा से लालकृष्ण आडवाणी जी चुनाव लड़ते थे लेकिन हवाला कांड में लालकृष्ण आडवाणी जी का नाम आने के कारण वह इस बार गांधीनगर से चुनाव लड़ नहीं सके और इस चुनाव में भी अटल बिहारी वाजपेई जी दोनों ही सीट पर विजय हुवे
बाजपेई जी को गुजरात और महाराष्ट्र नाटक में जीत के बाद लालकृष्ण आडवाणी द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया इस समय लालकृष्ण आडवाणी जी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं
सन 1996 की लोकसभा  चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और वाजपेई जी पहली बार प्रधानमंत्री बने हालांकि उनकी सरकार संसद में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाई इसके चलते 13 दिनों के भीतर ही सरकार गिर गई
1998 में दोबारा लोकसभा चुनाव में पार्टी को अधिक सीटें मिली और कुछ अन्य दलों की सभा गीता से एनडीए का गठन कर तो बिहारी वाजपेई फिर एक बार प्रधानमंत्री बने लेकिन जयललिता की पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया जिसके चलते 13 महीने में ही सरकार गिर गई
सन 1999 में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने फिर एक बार सत्ता प्राप्त की और इस बार अटल बिहारी बाजपेई ने अपना एक पूर्ण कालीन प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल पूरा किया अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए कई योजनाओं पर काम किया जिसके बारे में हम एक-एक करके जानते हैं



अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते किये गए कार्य  – Work done while Atal Bihari Vajpayee’s Prime Minister

  1. प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेई जी ने निजी करण को बढ़ावा दिया और इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए भाटी जी ने सन 1999 में अपनी सरकार में एक और मंत्रालय को जोड़ दिया जिसे विनिवेश मंत्रालय नाम दिया गया जिसके मंत्री अरुण शौरी बनाए गए और अरुण शौरी के इस मंत्रालय ने अटल जी के नेतृत्व में हिंदुस्तान जिंक इंडियन पेट्रोकेमिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड विदेश संचार निगम लिमिटेड भारत एल्युमिनियम कंपनी जैसी सरकारी कंपनियों को बेचने की प्रक्रिया को शुरू किया
    इन कंपनियों के निजी करण से इनमें होने वाली नियुक्तियों में आरक्षण की बाध्यता अपने आप समाप्त हो गई लेकिन विपक्षियों द्वारा अटल जी के निजीकरण को बढ़ावा देने वाले इस कदम की आज भी आलोचना की जाती है देश में बीमा का क्षेत्र सरकारी कंपनियों के ही हाथों था लेकिन अटल जी की सरकार के समय ही बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश के रास्ते खोले गए और विदेशी निवेश की सीमा को 26 फ़ीसदी तक बढ़ा दिया गया
  2. अटल बिहारी वाजपेई जी का एक सपना था कि वह सड़कों के माध्यम से पूरे भारत को जोड़ना चाहते थे जिसमें वह कुछ हद तक सफल भी हुए थे और उनकी इस योजना को प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा सराहा गया उन्होंने मुंबई दिल्ली कोलकाता और चेन्नई को सड़कों के माध्यम से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना को लागू किया
    साथ ही ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को लागू किया जिससे देश के आर्थिक विकास को रफ्तार मिली
  3. भारत में संचार को आम लोगों तक पहुंचाने का कार्य भाजपा सरकार द्वारा ही किया गया भले ही भारत में संचार क्रांति का जनक राजीव गांधी तथा उनके द्वारा नियुक्त किए गए सैम पित्रोदा को माना जाता है
    लेकिन सन 1999 में अटल जी ने भारत संचार निगम लिमिटेड के एकाधिकार को खत्म करते हुए एक नई टेलीकॉम नीति बनाई जिसके कारण रेवेन्यू शहरी मॉडल के जरिए लोगों को सस्ती दरों पर फोन कॉल करने का फायदा मिलना चालू हुआ जिससे सस्ते मोबाइल फोंस शुरू हुए
  4. अटल जी ने शिक्षा क्षेत्रों में भी कई अहम फैसले लिए जिसमें उनके द्वारा एक अभियान चलाया गया जिसे सर्व शिक्षा अभियान का नाम दिया गया जिसमें 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया गया इस अभियान के कारण नहीं बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई
    इस अभियान से पहले जहां 40 फ़ीसदी बच्चे ड्रॉपआउटस कल लेते थे उनकी संख्या इस अभियान के बाद 10% ही रह गई इस अभियान की थीम लाइन स्कूल चले हम अटल बिहारी वाजपेई ने स्वयं ही लिखा था
  5. बाजपेई के नेतृत्व में सन 1998 में भारत में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था जिसका उद्देश्य यह दिखाना था कि भारत एक परमाणु संपन्न देश है लेकिन इस परीक्षण की जरूरत और उनके आलोचकों द्वारा सवाल उठाए गए जिसके बाद अमेरिका ब्रिटेन कनाडा और कई पश्चिमी देशों ने भारत पर आरती पाबंदी लगा दी थी लेकिन अटल जी की कूटनीति के कौशल के कारण 2001 के आते-आते ज्यादातर देशों में पाबंदी हटा ली थी
  6. अटल बिहारी वाजपेई ने सन 1999 में सरकार बनने से पहले एच डी देवगौड़ा सरकार ने जातिवार जनगणना कराने को मंजूरी दी थी जिसके बाद 2001 में जातिगत जनगणना होने वाली थी ऐसे में मंडल कमीशन के प्रावधानों को सही तरीके से लागू किया जा रहा है या नहीं यह जानने के लिए जातिगत जनगणना कराए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी न्यायिक प्रणाली की ओर से बार-बार तथ्यात्मक आंखों को उठाने की बात कही जा रही थी
    ताकि कोई अच्छी कार्यप्रणाली बनाई जा सके जातिगत जनगणना के लिए तत्कालीन रजिस्टार जनरल ने भी मंजूरी दे दी थी लेकिन अटल जी ने इस फैसले को पलट दिया और जातिवार जनगणना नहीं हो पाई जिससे अटल जी के इस फैसले की बहुत ही आलोचना की गई

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार मंत्रिमंडल – Atal Bihari Vajpayee’s Government Cabinet

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार मंत्रिमंडल
प्रधानमंत्री : अटल बिहारी वाजपेयी
गृहमंत्री : लालकृष्ण आडवाणी
नागरिक उड्डयन मंत्री : अनंत कुमार
उद्योग मंत्री : सिकंदर भक्त
खाद्य के अतिरिक्त प्रभार के साथ रसायन और उर्वरक मंत्री: सुरजीत सिंह बरनाला
रक्षा मंत्री : जॉर्ज फ़र्नान्डिस
वाणिज्य मंत्री : रामकृष्ण हेगड़े
श्रम मंत्री : सत्यनारायण जटिया
शहरी विकास मंत्री: राम जेठमलानी
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अतिरिक्त प्रभार के साथ मानव संसाधन विकास मंत्री : मुरलीमनोहर जोशी
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री: वृजपेड्डी के राममूर्ति
पर्यटन के अतिरिक्त प्रभार के साथ संसदीय मामलों के मंत्री : मदन लाल खुराना

अटल बिहारी वाजपेयी कितनी बार भारत के प्रधानमंत्री बने

 वैसे तो अटल बिहारी जी का एक प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार कार्यभार संभाला, लेकिन वह सिर्फ एक बार ही अपना  पूर्णकालिक कार्यकाल मैं सफल हो पाए.  भले ही अटल जी एक बार ही पूरे कार्यकाल शासन चला पाए लेकिन उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा
 उन्होंने कई अहम फैसले लिए और बहुत अच्छे से अपने पद का निर्वहन किया उनके कार्यकाल में कई संघर्ष भी आए जिन्हें उन्हें बखूबी संभाला और उनका सामना किया कई मौके ऐसे भी आए जब उनके आलोचकों ने उनकी आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन सभी को साथ लेकर उन्होंने अपने कार्यकाल को पूरा किया



अटल बिहारी जी की मृत्यु कब और कैसे हुई

अटल बिहारी जी की मृत्यु 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स  अस्पताल में करीब शाम 5:00 बजे हुआ था, उन्हें जून 2018 में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से AIIS में भर्ती कराया गया था. वह 93 वर्ष आयु के हो चुके थे


इनकी मृत्यु के तुरंत बाद श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक ट्वीट कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त उन्होंने ट्वीट में लिखा था वाजपेयी के निधन के बाद पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के अटल बिहारी जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। 
उनका हमारे बीच से जाना, एक युग का अंत है।’ उन्होंने यह भी लिखा कि अटल जी की प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर बीजेपी कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे। 
अटल जी की अस्थियों को देश की 100 नदियों में प्रवाहित किया था और इसकी शुरुआत हरिद्वार में गंगा में विसर्जन के साथ हुई थी.
उनकी स्मृति में दिल्ली में एक समाधि स्थल बनाया गया इसे “सदैव अटल” नाम दिया गया भारतीय जनता पार्टी तथा उनके समर्थकों द्वारा 16 अगस्त को हर वर्ष अटल जी की पुण्य तिथि पर याद किया जाता है



 अटल बिहारी जी की 5 प्रमुख कविताएं – 5 Poem of atal bihari

अटल बिहारी जी को सिर्फ एक राजनेता और वक्ता के तौर पर नहीं ही जाना जाता  वे एक प्रखर वक्ता के साथ-साथ एक कवि भी थे और उन्होंने कई ऐसी रचनाएं की जिन्हें आज भी  सराहा जाता है उन्होंने राजनीतिक जीवन में रहते हुए भी सामाजिक ताने-बाने को पहचान  और प्रकृति के मनोहर दृश्य  को निहार कर अपनी रचनाओं में कुछ इस तरह पिरोया की आज भी उनकी कविताएं उनके व्यक्तित्व को और प्रखर बनाती है तो चलिए जानते हैं अटल बिहारी जी की कविताओं के बारे में 0

  1. कौरव कौन
    कौन पांडव,
    टेढ़ा सवाल है|
    दोनों ओर शकुनि
    का फैला
    कूटजाल है|
    धर्मराज ने छोड़ी नहीं
    जुए की लत है|
    हर पंचायत में
    पांचाली
    अपमानित है|
    बिना कृष्ण के
    आज
    महाभारत होना है,
    कोई राजा बने,
    रंक को तो रोना है|
  2.    ठन गई! 
    मौत से ठन गई! 

    जूझने का मेरा इरादा न था, 
    मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, 
    रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
    यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। 

    मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, 
    ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। 
    मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, 
    लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं? 
    तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ, 
    सामने वार कर फिर मुझे आज़मा। 
    मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, 
    शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर। 
    बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, 
    दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। 
    प्यार इतना परायों से मुझको मिला, 
    न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला। 

    हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, 
    आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। 

    आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, 
    नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है। 
    पार पाने का क़ायम मगर हौसला, 
    देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई। 

    मौत से ठन गई!       
  3.  क्षमा करो बापू! तुम हमको,
    बचन भंग के हम अपराधी,
    राजघाट को किया अपावन,
    मंज़िल भूले, यात्रा आधी।

     जयप्रकाश जी! रखो भरोसा,
    टूटे सपनों को जोड़ेंगे।
    चिताभस्म की चिंगारी से,
    अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।
  4.  खून क्यों सफेद हो गया?
    भेद में अभेद खो गया.
    बंट गये शहीद, गीत कट गए,
    कलेजे में कटार दड़ गई.
    दूध में दरार पड़ गई.
    खेतों में बारूदी गंध,
    टूट गये नानक के छंद
    सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है.
    वसंत से बहार झड़ गई
    दूध में दरार पड़ गई.
    अपनी ही छाया से बैर,
    गले लगने लगे हैं ग़ैर,
    ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता.
    बात बनाएं, बिगड़ गई.
    दूध में दरार पड़ गई.
  5. उजियारे में, अंधकार में,
    कल कहार में, बीच धार में,
    घोर घृणा में, पूत प्यार में,
    क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
    जीवन के शत-शत आकर्षक,
    अरमानों को ढलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.
    सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
    प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
    सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
    असफल, सफल समान मनोरथ,
    सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
    पावस बनकर ढलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.

    कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
    प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
    नीरवता से मुखरित मधुबन,
    परहित अर्पित अपना तन-मन,
    जीवन को शत-शत आहुति में,
    जलना होगा, गलना होगा.
    क़दम मिलाकर चलना होगा.

अटल बिहारी वाजपेई जी के विचार  – Thoughts of Atal Vajpayee

अटल बिहारी वाजपेई जी के बहुत ही उच्च विचार थे तो वह अपने विचारों को अपनी कविताओं की रचनाओं के माध्यम से लोगों को समझाने की कोशिश करते थे दिल की कविताएं पढ़कर आप उनके विचारों के बारे में जान सकते हैं उन विचारों के बारे में आपको बताएंगे

  1. हमे जलना होगा, गलना होगा।  कदम मिलकर चलना होगा
  2. मुझे अपने हिंदुत्व पर अभिमान है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्लिम विरोधी हूं।
  3.  सूर्य एक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। लेकिन ओस की बूंद भी तो एक सच्चाई है, यह बात अलग है कि यह क्षणिक है।
  4. निराशा की अमावस के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊँचा उठाकर देखें।
  5.  सेवा कार्यों की उम्मीद सरकार से नहीं की जा सकती। उसके लिए समाज सेवी संस्थाओं को ही आगे बढ़ना पड़ेगा।
  6. हमारे पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा कि चुटकी तो बज सकती है।
  7. मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़ें, एक स्वप्न टूटे, तो दूसरा गढ़े।      
  8. मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़ें, एक स्वप्न टूटे, तो दूसरा गढ़े।
  9. पौरुष, पराक्रम, वीरता हमारे रक्त में है। यह हमारी महान परंपरा का अभिन्न अंग है। यह संस्कारों द्वारा हमारे जीवन में ढाली गई है।
  10. हम एक विश्व के आदर्शों की प्राप्ति और मानव कल्याण तथा उसकी कीर्ति के लिए त्याग और बलिदान की बेला में कभी भी कदम पीछे नहीं हटाएंगे।
  11. छोटे मन से कोई बड़ा नहीं हो सकता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं हो सकता।

अटल  बिहारी के बारे में 9 रोचक तथ्य – 9 Interesting facts about Atal Bihari

  1. अटल बिहारी वाजपेई जी को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से 2014 में नवाजा जा चुका
  2. वे तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले गैर कांग्रेसी व्यक्ति है
  3. 1942 में महात्मा गाँधी जी के  चलाये गए “अंग्रेजों भारत छोड़ो” आन्दोलन में किशोर होते हुए भी उन्होंने हिस्सा लिया. और आगरा जेल के बच्चा बैरक में 24 दिन बिताने पड़े थे
  4. 1948 में अटल जी ने वाराणसी के एक अखबार “समाचार” में बतौर पत्रकार काम किया था
  5. उन्हें अपनी वाणी और भाषा में जबरदस्त पकड़ होने के कारण सरस्वती पुत्र के नाम से भी संबोधित किया जाता था.
  6. 4 राज्यो की 6 अलग-अलग लोकसभा सीटों से चुनाव जीतने वाले वे एक मात्र सांसद थे.
  7. वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था
  8. देश के चारों कोनो को जोड़ने वाली 5846 km लम्बी Golden Quadrilateral योजना उन्ही की देन थी.
  9. अटल बिहारी वाजपेई आजीवन अविवाहित रहे|